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Class 10th crash course (Bihar Board, All Subjects)
Rating: 4.3 out of 5(3 ratings)
40 students
Last updated 11/2020
Hindi

What you'll learn

  • Identify, formulate and solve integrative All subject problems.
  • Use best technique and tricks to solve Math's problem easily.
  • Teach very Easy way to solve the Physics problem.
  • The best way to teach the math's chapter.
  • This class is dedicated for all the students going to appear in coming BSEB Board examination.
  • To Achieve High score in Board Exam

Course content

13 sections125 lectures31h 46m total length
  • Introduction0:22
  • अध्याय -1 रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण1:41:29
    • जब कोई पदार्थ अकेले ही या किसी अन्य पदार्थ के साथ क्रिया करके एक या अधिक भीड़ गुण वाले ने पदार्थों का निर्माण करता है तो वह क्रिया रासायनिक अभिक्रिया कहलाती हैI

    • रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों के संकेतों एवं चित्रों की सहायता से रासायनिक अभिक्रिया का निरूपण , रासायनिक समीकरण कहलाता है।

    • जिस रासायनिक अभिक्रिया में प्रतिफल के साथ-साथ ऊष्मा- उर्जा भी निकलती है, उसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते है।

  • अध्याय -2 अम्ल, क्षार एवं लवण39:53

    अम्ल - ACID

    • ACID शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है खट्टा

    • हमले स्वाद में खट्टे होते हैं

    • यह नीले लिटमस को लाल में बदल देते हैं

    • यह जलीय विलियन में H+ आयन देते हैं

    • अम्ल के उदाहरण

      HCl, H2 SO4, HNO3, CH3COOH आदि

    • सान्द्र अम्ल - जिससे हम अधिक मात्रा में और जल अल्प मात्रा में होता है तो उसे सांद्र अम्ल कहा जाता है

    • तनु अम्ल- जिसमें अम्ल अल्प मात्रा में और जल अधिक मात्रा में होता है तो उसे तनु अम्ल कहा जाता है

    क्षारक - BASE

    • यह स्वाद में कड़वे होते हैं

    • यह लाल लिटमस को नीला में बदल देते हैं

    • यह जलीय विलियन में OH- आयन देते  है

    • क्षारक के उदाहरण,

      NaOH, KOH, Ca (OH)2

    • क्षार - जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहां जाता है जैसे - NaOH, KOH आदि

    • लवन - लवण, अम्ल व क्षारक की परस्पर अभिक्रिया से प्राप्त होता है

  • अध्याय -3 धातु और अधातु13:05

    धातु एवं अधातु

    पृथ्वी पर पाये जाने वाले सभी पदार्थ तत्वों के बने होते हैं। अभी तक लगभग 112-15 तत्व ज्ञात हैं जो पृथ्वी पर लगभग सभी पदार्थो को बनाते हैं इनमें लगभग 80 तत्व धातु हैं तथा बाकि अधातु या उपधातु है।

    धातु

    • सामान्यतः धातु विधतु एवं उष्मा के सुचालक, आघातवर्धनिय एवं तन्य होते हैं। तथा कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में होते है। केवल पारा ही एक मात्र ऐसा धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में होता है।

    • रासायन शास्त्र के अनुसार धातु वे तत्व है जो सरलता से इलेक्ट्रान त्याग कर धनायन बनाते है। और धातुओं के परमाणुओं के साथ धात्विक बंध बनाते है।

    • सामान्यतः धातु रासायनिक रूप से सक्रिय होते हैं। अर्थात वे मुक्त रूप में नहीं मिलते वे अन्य तत्वों के साथ क्रिया कर लेते हैं और संयुक्त रूप में (यौगिक) पाये जाते हैं। जिन्हें खनिज कहते हैं। कुछ धातु मूल रूप या धात्विक रूप में पाये जाते हैं। जैसे - सोना, चांदी प्लेटिनम आदि। कभी-कभी शु़़़द्ध धातु ढेर के रूप में पायी जाती है जिन्हें नगेट कहते हैं।

    • प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातु पृथ्वी में पायी जाती है खनिज कहलाते हैं। खनिज जिनसे आर्थिक महत्व के धातु आसानी से अलग किये जा सकते हैं। उन्हें अयस्क कहते हैं।

    अधातु

    सामान्यः अधातुएं विधुत व उष्मा की कुचालक, अतन्य होती हैं। ये धातुओं कि तरह कठोर न हो कर भंगुर होती हैं। सामान्यः आधातवध्र्य नहीं होती। तथा इनका गलनांक धातुओं से अपेक्षाकृत कम होता है।

  • अध्याय -4 कार्बन और इसके यौगिक

    कार्बन और इसके यौगिक

    यह रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत कार्बन यौगिकों का अध्ययन किया जाता है। कार्बनिक यौगिकों के बिना की संभावना नहीं है। जंतुओं और वनस्पतियों के निर्माण में कार्बनिक यौगिक ही प्रमुख हैं। कार्बनिक यौगिकों के कुछ अति प्रमुख उपयोग निम्न हैं:

    1. हमारा भोजन: सभी भोज्य पदार्थ प्राय: कार्बनिक यौगिकों से निर्मित हैं जैसे-चावल, आटा, चीनी, प्रोटीन, विटामिन आदि सभी कार्बनिक पदार्थ हैं।

    2. हमारे दैनिक उपयोग के पदार्थ: हमारे सूती कपड़े सेलुलोज के बने हैं। नायलोन, टेरीलीन, रेयॉन आदि के कपड़े सांश्लेषिक कार्बनिक यौगिकों से निर्मित हैं। पेन, स्याही, जूते आदि कार्बनिक यौगिक ही से बने हैं। साबुन, बेसलीन, क्रीम लकड़ी, कोयला, घरेलू गैस, मिट्टी का तेल आदि कार्बनिक यौगिक ही हैं।

    3. औषधियाँ: निषचेतक पदार्थ क्लोरोफार्म, स्ट्रेप्टोमाइसिन, ऐस्पिरिन, पेनसिलिन आदि कार्बनिक यौगिक ही हैं। कीटाणुनाशक जैसे-डी.डी.टी., गेमेक्सीन, बी. एच.सी. आदि कार्बनिक यौगिक हैं।

    4. यातायात: पेट्रोल, तेल, रबर, टायर आदि कार्बनिक पदार्थ हैं।

    5. प्रसाधन तथा विलास सामग्री: क्रीम, पेन्ट, साबुन, तेल, फोटो फिल्म तथा प्लास्टिक के खिलौने आदि कार्बनिक यौगिक हैं।

    6. विस्फोटक पदार्थ: डायनामाइट, नाइट्रोग्लिसरीन, टी. एन. टी. आदि कार्बनिक यौगिक हैं।

  • अध्याय -5 तत्वों के आवर्त वर्गीकरण PART -17:09

    तत्वों के आवर्त वर्गीकरण

    • आवर्ती वर्गीकरण (Periodic Classification): किसी मौलिक गुण को आधार बनाकर की गई पदार्थों की ऐसी व्यवस्था जिसमें निश्चित अंतराल के बाद समान गुण वाले पदार्थ पुनः उपस्थित हों, आवर्ती व्यवस्था या आवर्ती वर्गीकरण कहलाती है। तत्वों के वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य समान गुणों वाले तत्वों को एक वर्ग में रखकर रसायनशास्त्र के अध्ययन को सरल, सुविधाजनक, सुस्पष्ट एवं क्रमबद्ध बनाना है।

    • तत्वों के वर्गीकरण का इतिहास: 19वीं शताब्दी में तत्वों के वर्गीकरण के कई प्रयास किये गए जिनमें प्राउट की परिकल्पना, डोबरेनर का त्रिक सिद्धांत, डूमा की सममूलक श्रेणी, न्यूलैण्डस का अष्टक नियम, लोथर-मेयर का परमाणु आयतन तथा परमाणु भार वक्र, मेडलीफ का आवर्त नियम आदि प्रमुख हैं। तत्वों के वर्गीकरण के इन प्रारम्भिक प्रयासों में तत्वों के परमाणु भार (Atomic weight) को वर्गीकरण का आधार बनाया गया।

    • लेकिन डोबरेनर का त्रिक सिद्धांत कुछ ही तत्वों तक सीमित रहने के कारण विश्वव्यापी मान्यता प्राप्त नहीं कर सका। अतः कुछ समय पश्चात् तत्वों के वर्गीकरण की यह पद्धति त्याग दी गई। डूमा के विचार को भी व्यापक मान्यता नहीं मिल सकी और अंततः इसे भी त्याग दिया गया। न्यूलैंड्स द्वारा किए गए तत्वों के वर्गीकरण की पद्धति में अनेक त्रुटियाँ सामने आई जिस कारण यह नियम अधिक प्रचलित नहीं हो सका और आगे चलकर इसे त्याग दिया गया।

  • अध्याय - 6 प्राकृतिक संसाधन का प्रबंधन34:25

    प्राकृतिक संसाधन

    भौतिक जगत के समस्त प्राणियों की उत्पत्ति एवं सृजन पंच महाभूतों यथाक्षिति, जल, पावक, गगन, समीर से हुई है। इन पंच महाभूतों को ही ‘‘भगवान‘‘ की संज्ञा भी दी जा सकती है, क्योंकि भगवान शब्द चार व्यंजन एवं एक स्वर के योग से बना है। यथा भ-भूमि, ग-गगन, व-वायु, अ-अग्नि एवं न-नीर। इन पंचतत्वों में जीवन के मुख्य आधार भूमि, जल एवं वनस्पति को प्रमुखता देते हुये मनीषियों ने इसे प्रथम तीन स्थानों पर रखा है जो क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से जितना समृद्ध होगा वह उतना ही विकसित होगा।

    मुख्य रूप से पाँच प्राकृतिक संसाधन है, 1-जमीन, 2-जल, 3-जंगल, 4-जानवर, 5-जन।

    1- जमीन-

    मनुष्य मिट्टी से ही पैदा हुआ है और मिट्टी में ही मिल जायेगा। कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 242 लाख हेक्टेयर समस्याग्रस्त 120 लाख हेक्टेयर। विभिन्न क्षेत्रों (पर्वतीय, मैदानी, बीहड़) में 05 टन से 70 टन प्रति हे0 प्रति वर्ष की दर से मृदा कटाव होता है।

    2- जल -

    ‘‘ जल ही जीवन है ‘‘ उपलब्ध जल का 90 प्रतिशत सिंचाई में 4 प्रतिशत उद्योग में 3 प्रतिशत पीने के लिये उपयोग होता है। वर्षा जल का 90 प्रतिशत पानी भूमि जल संरक्षण के अभाव में बेकार चला जाता है। जल वृद्धि स्तर लगातार घट रहा है।

    3- जंगल -

    वर्षा जल में वन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है प्रदेश में वन आच्छादित क्षेत्रफल 33 प्रतिशत के स्थान पर मात्र 10 प्रतिशत है।

    4 -जानवर

    प्रदेश में कुल पशुधन लगभग 07 करोड़ हैं जिसमें ज्यादातर अनुत्पादक है। रोजगार एवं टिकाऊ खेती हेतु मिश्रित खेती/ कार्बनिक खेती को प्राथमिककता देनी होगी।

    5-जन -

    प्रदेश की जनसंख्या लगभग 17 करोड़ है, जो संसाधनों के मुकाबले बहुत अधिक है। प्रदेश की जनसंख्या एक सम्पत्ति है न कि विपत्ति। इसलिये जनसंख्या नियोजन किये जाने की आवश्यकता है और अधिक उत्पादन अधिकतम हाथों में होना चाहिये।

Requirements

  • YES, candidate should passed class 9th.

Description

This course is designed for students looking to strengthen their concepts as well as get exposed to the different types of questions asked in the Board Exam without having to deviate too much from their own preparation.

The sessions cover all the important topics as well as strategies for the exam. Students can resolve their doubts later on with the respective faculty members.

  • Concept will be taught in easy way so that weak students can also understand and remember.

  • Important formulae and trick will be focused more and way that how to remember easily.

  • Real feel as in physical class room. so no any problem in interaction.

  • Dedicated, resourceful and goal-driven professional educator with a solid commitment to the social and academic growth and development of every student.

  • An accommodating and versatile individual with the talent to develop inspiring hands-on lessons that will capture a student imagination and breed success.

  • Highly motivated, enthusiastic and dedicated educator who wants all student to be successful learners.

  • Committed to creating a classroom atmosphere that is stimulating and encouraging to students.

  • Aptitude to remain flexible, ensuring that every student's learning styles and abilities are addressed.

  • Demonstrated ability to consistently individualize instruction, based on student's needs and interests.

  • Skilled in adapting to students' diverse learning styles.


Who this course is for:

  • Class 10th Bihar Board
  • 10th class student
  • matric student (Hindi medium)
  • All Bihar Board Matric student
  • All Bihar Board 10th student
  • This class is dedicated for all the students going to appear in coming BSEB Board examination.
  • class 10th Hindi Medium
  • Hindi Medium Bihar Board