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भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा
2 students

भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा

भारत एवं 'भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा' को जानने की दिशा में पहला कदम
Last updated 8/2024
Hindi

What you'll learn

  • भारतवर्ष ब्रह्मनिष्ठ साधु संतो की तपोभूमि है । परम सत्य का ज्ञान भारत की आत्मा है ।
  • प्राचीन भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा अति समृद्ध थी तथा इसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समाहित करते हुए व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व को विकसित करना था ।
  • जब सारा विश्व अज्ञान के अंधकार में भटकता था तब भारत के मनीषी उच्च ज्ञान का प्रसार कर मानव को पशुता से मुक्त,श्रेष्ठ संस्कारों से युक्तकर संपूर्ण मानव बनाते थे।
  • भारत में शिक्षा का लक्ष्य सांसारिक विषय भोग नहीं बल्कि पूर्ण आत्म ज्ञान और मुक्ति के रूप में माना गया है ।
  • सभी प्राचीन भारतीय शास्त्र बताते हैं कि मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार है ।

Course content

10 sections • 14 lectures • 1h 52m total length
  • Introduction4:09

Requirements

  • आपको पहले से भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा के बारे में ज्ञान की आवश्यकता नहीं है ।
  • आप यहां आरंभ से भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा के बारे में सीखेंगे ।

Description

भारतवर्ष ब्रह्मनिष्ठ साधु संतो की तपोभूमि है । परम सत्य का ज्ञान भारत की आत्मा है । प्राचीन भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा अति समृद्ध थी तथा इसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को समाहित करते हुए व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व को विकसित करना था । जब सारा विश्व अज्ञान रूपी अंधकार में भटकता था तब सम्पूर्ण भारत के मनीषी उच्चतम ज्ञान का प्रसार करके मानव को पशुता से मुक्त कर, श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त कर संपूर्ण मानव बनाते थे ।

यह कोर्स छात्रों को भारत की आत्मा, परम सत्य के ज्ञान से परिचित कराने के लिए बनाया गया है । इस पवित्र ज्ञान को पाने के लिए इस पाठ्यक्रम में एक संक्षिप्त विवरण है जिसे एक शिष्य को सीखना चाहिए ।

तत्कर्म यन्न बंधाय सा विद्या या विमुक्तये ।
अर्थात्, कर्म वही है जो बंधनों से मुक्त करे

और विद्या वही है जो मुक्ति का मार्ग दिखाए ।


शिक्षा के इस संकल्प को भारतीय परंपरा में वर्षों से अंगीकृत किया जाता रहा और तदनुरूप ही विश्वविद्यालयों औरगुरुकुलों में प्राचीन काल की शिक्षा प्रणाली और परंपराएं थीं । घर, मंदिर, पाठशालाओं तथा गुरुकुलों में संस्कार युक्तस्वदेशी शिक्षा दी जाती थी । भारत में शिक्षा का लक्ष्य सांसारिक विषय भोग नहीं बल्कि पूर्ण आत्म ज्ञान और मुक्ति के रूपमें माना गया है ।

भारतवर्ष में गुरुकुल शिक्षा के प्रमुख आधार स्तम्भ थे । शिक्षार्थी अठारह विद्याओं का अध्ययन गुरु के निर्देशन में ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अनुष्ठानपूर्वक करते थे ।
सभी प्राचीन भारतीय शास्त्र बताते हैं कि मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार है । और इसी उद्देश्य से हममनुष्य जन्म लेते हैं, क्योंकि मनुष्य जन्म ही मुक्ति का एकमात्र साधन है ।

इस पाठ्यक्रम में हम इन विषयों का संक्षिप्त अध्ययन करेंगे ।और साथ में देखेंगे प्रस्थानत्रय – उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र औरश्रीमद्भगवद्गीता । शब्द ‘उपनिषद्’ का अर्थ, प्रमुख उपनिषद्, रामायण और महाभारत संक्षिप्त रुप से । हम देखेंगे कि मानवजीवन का उद्देश्य क्या है । व्यक्ति के जीवन में ‘गुरु का महत्व’ क्या है' । और हम देखेंगे ‘ॐ - ओम्’ क्या है ।

‘भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा’ का आनंद लें !

शुभमस्तु ।

Who this course is for:

  • जो भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा के लिए एकदम नये हैं और सीखना चाहते हैं