
बकरी पालन का परिचय - इस अध्याय में बकरी पालन क्या होता है, इसके फायदे, नुकसान, भारत में इसकी स्थिति आदि पर विस्तृत चर्चा की गई है।
बकरी पालन क्यों करें - इस अध्याय में बकरी पालन करने के आर्थिक, सामाजिक और व्यावहारिक फायदों पर प्रकाश डाला गया है।
बकरी पालन के तरीके - इस अध्याय में छोटे और बड़े पैमाने पर, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन करने के तरीकों का वर्णन किया गया है।
बकरी पालन व्यवसाय भाग 1 - इस अध्याय में मांस के लिए बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया और इसमें संलग्न चुनौतियों पर चर्चा की गई है।
बकरी पालन व्यवसाय भाग 2 - इस अध्याय में बकरी ईद के मौसम में मांग को पूरा करने और अधिक मुनाफा कमाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है।
बकरी पालन व्यवसाय भाग 3 - नस्ल विकास और निर्यात के लिए - इस अध्याय में बकरी पालन को नस्ल विकास और निर्यात के उद्देश्य से कैसे किया जाए, इसकी जानकारी दी गई है। इसमें नस्लों का चयन, संकर नस्ल विकास, गुणवत्तायुक्त पशुओं का प्रबंधन आदि शामिल है।
चारे के प्रकार - इस अध्याय में हरे चारे, सूखे चारे, राई-बाजरा जैसे अनाज के चारे, खनिज लवणों से युक्त चारे आदि विभिन्न प्रकार के चारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
चारा टाइमटेबल - इस अध्याय में बकरियों की उम्र, प्रजनन अवस्था आदि के आधार पर चारे के उपयुक्त समय और मात्रा का निर्धारण करने पर प्रकाश डाला गया है।
चारा प्रोडक्शन स्ट्रक्चर - इस अध्याय में बकरियों के लिए चारे के उत्पादन के लिए ज़मीन की तैयारी, बीज बोने का सही तरीका, सिंचाई की व्यवस्था, खाद व कीटनाशकों का उपयोग आदि विषयों पर चर्चा की गई है।
साइलेज चारा - इस अध्याय में साइलेज चारे के लाभ, इसके निर्माण की विधियाँ, और बकरियों को खिलाने के तरीके पर चर्चा की गई है।
हाइड्रोपोनिक चारा - इस अध्याय में हाइड्रोपोनिक्स की तकनीक से घर पर चारे के उत्पादन के बारे में बताया गया है।
शेड निर्माण - इस अध्याय में शेड का निर्माण, आकार, सामग्री, वेंटिलेशन आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
शेड का फील्ड स्टडी - इस अध्याय में व्यवहारिक रूप से शेड बनाने का लाइव डेमो दिया जाएगा।
बकरी की नस्लें - इस अध्याय में भारत में पाई जाने वाली प्रमुख बकरी नस्लों जैसे जमुनापारी, सिरोही, बरबरी आदि की विशेषताओं और उनके रखरखाव पर चर्चा की गई है।
स्वास्थ्य प्रबंधन - टीकाकरण - इस अध्याय में बकरियों के लिए जरूरी विभिन्न प्रकार के टीके और उनके टीकाकरण कार्यक्रम पर प्रकाश डाला गया है।
स्वास्थ्य प्रबंधन - डीवर्मिंग - इस अध्याय में बकरियों में होने वाले कृमि रोगों के लक्षण, निदान और उपचार पर चर्चा की गई है।
स्वास्थ्य प्रबंधन - रोग प्रबंधन - इस अध्याय में बकरियों में होने वाले आम रोगों की पहचान और उपचार के बारे में बताया गया है।
बकरी पालन प्रबंधन भाग 1 - इस अध्याय में बकरी पालन फार्म के प्रबंधन के पहलुओं जैसे भूमि, मानव संसाधन आदि पर प्रकाश डाला गया है।
बकरी पालन प्रबंधन भाग 2 - इस अध्याय में बकरी पालन फार्म के विपणन पहलुओं जैसे उत्पादों की कीमत निर्धारण, ग्राहक संबंध आदि पर चर्चा की गई है।
लोन - प्रोसेस और डॉक्यूमेंटेशन - इस अध्याय में बकरी पालन हेतु बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज़ों के बारे में बताया गया है।
लोन - उपलब्ध सेवाएँ - इस अध्याय में बकरी पालन हेतु बैंकों द्वारा दी जाने वाली विभिन्न लोन सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई है।
बकरी पालन - एक लाभदायक ग्रामीण व्यवसाय
बकरी पालन भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बकरी पालन के लिए ज़्यादा पूंजी निवेश की आवश्यकता नहीं होती और यह कम लागत में उच्च मुनाफे वाला व्यवसाय है।
बकरी पालन से किसानों को दूध, मांस, बकरी का गोबर जैसे कई मूल्यवान उत्पाद प्राप्त होते हैं जिनकी अच्छी कमाई होती है। बकरी का गोबर खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद करता है।
बकरियाँ आसानी से पाली जा सकती हैं क्योंकि इन्हें बड़े पशुशाला की आवश्यकता नहीं होती। एक छोटा शेड या छतरी इनके लिए पर्याप्त होता है। बकरियां कम लागत वाले चारे जैसे झाड़ियों, पत्तियों और कटाई के बाद बचे अनाज के रेशे आदि पर पल सकती हैं।
बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है और वे विभिन्न मौसमी स्थितियों जैसे गर्मी, सर्दी व वर्षा का सामना कर सकती हैं। इसलिए बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में एक लाभदायक ग्रामीण उद्यम है।
बकरी पालन से ग्रामीण युवाओं को रोजगार और व्यवसाय के अवसर मिलते हैं। सरकार भी बकरी पालकों को विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और लोन उपलब्ध कराती है। इस पाठ्यक्रम में बकरी पालन के विभिन्न पहलुओं जैसे नस्ल चयन, आहार, देखभाल और बीमारियों की रोकथाम आदि की जानकारी दी जाएगी।